Olympic-News - Tokyo 2020 Olympic Games

 मेरी मां ने मुझ पर विश्वास किया और मेरे लिए कई त्याग किए।

मीराबाई चानू की जीत

मीराबाई चानू के सिल्वर मेडल के अलावा उनकी कान की बालियों ने भी खूब ध्यान बंटोरा है। मीरा फाइनल में ओलिंपिक के छल्लों के आकार की बालियां पहनकर रिंग में उतरी थीं। ये बालियां मीरा की मां तोम्बी लीमा ने 2016 रियो ओलिंपिक से पहले अपने जेवर बेचकर उन्हें तोहफे में दी थीं।

मीराबाई की मां को उम्मीद थी कि इससे उनका भाग्य चमकेगा। हालांकि, रियो में वे डिस-क्वालिफाई हो गईं। पर 2020 टोक्यो गेम्स में सिल्वर जीतकर उन्होंने मां के त्याग को सफल कर दिया। फाइनल में जब तोम्बी ने मीरा के कानों में वही बालियां देखीं, तो वे खुशी से रो पड़ीं।

लीमा ने कहा कि मैंने बालियां टीवी पर देखी थी। मैंने ये उसे 2016 में रियो ओलंपिक से पहले दी थी। मैंने मेरे पास पड़े सोने और अपनी बचत से इन्हें बनवाया था, ताकि इससे उसका भाग्य चमके और उसे सफलता मिले। अब उन्हीं बालियों में मेडल जीतते देखना मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी है। मीरा के पिता सेखोम कृति की आंखें भी नम हुईं। ये खुशी के आंसू हैं। मीरा ने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की है।

मीराबाई को टोक्यो में इतिहास रचते हुए देखने के लिए उनके घर में कई रिश्तेदार और दोस्त भी मौजूद थे। मीरा ने भी सिल्वर जीतने के बाद अपनी मां को याद किया। उन्होंने कहा कि मां के त्याग की वजह से ही मैं सफल हो पाई हूं।

36 साल की चानू ने कुल 202 किग्रा वजन उठाकर शानदार प्रदर्शन किया। मणिपुर की राजधानी इंफाल से 25 किमी दूर मीराबाई के नोंगपोक काकचिंग गांव में स्थित घर में शुक्रवार रात से ही मेहमानों का आना-जाना लगा हुआ था।

मीरा की मां लीमा ने कहा, उसने हमें कहा था कि वह कोई ने कोई मेडल जरूर जीतेगी। इसलिए सभी ऐसा होने का इंतजार कर रहे थे। जो रिश्तेदार आए, वे शुक्रवार रात को हमारे घर में ही रुके। टोक्यो में मीराबाई को खेलते हुए देखने के लिए लगभग 50 लोग मौजूद थे। इसलिए यह किसी त्योहार की तरह लग रहा था। कई पत्रकार भी आए। हमने पहले ऐसा कभी अनुभव नहीं किया था।

लीमा ने कहा- मीराबाई ने अपने इवेंट से पहले हमसे वीडियो कॉल पर बात भी की थी। उसने हमसे आशीर्वाद लिया। मीराबाई की रिश्ते की बहन अरोशिनी ने कहा- वह बहुत कम घर आती है। इसलिए एक-दूसरे से बात करने के लिए हमने वॉट्सऐप पर ग्रुप बना रखा है।